Saturday, 3 September 2011
धर्मं परिवर्तन पर एक नज़र
आज सुबह जब मई उठा तो हमेशा की तरह मैंने समाचार पत्र की तरफ नज़र दौड़ाई कुछ कोशिश करने पर वो मुझको मिल ही गया,मुख्या प्रष्ठ पर ही खबर थी की ईसाई संगठनो द्वारा हिन्दुओ के धर्म परिवर्तन पर हिन्दू संगठनो द्वारा पुतला दहन .मुझे यह पढ़कर बहुत हंसी आई और इस खबर ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया की धर्मं परिवर्तन का कारण क्या है? हम नए कपडे इसलिए पेहेनते है क्योंकि पुराना अब अच्छा नहीं लगता या फट जाता है या अब हम उसमे समां नहीं पाते..पर यहाँ तो धर्मं में बुरा लगने या 'कम जगह' होने जैसा कुछ है ही नहीं..हमारा धर्मं तो सब धर्मो का मूल है,मैंने फिर अपने इस छोटे से दिमाग को कष्ट दिया और ये समझ आया की जब हमको हमारे घर में सारी सुविधा न मिले और कोई दूसरा घर मुफ्त में मिल रहा हो 'पूर्ण सुविधायुक्ता' तो हम अपने आप ही उस घर की तरफ आकर्षित होंगे,यही हाल हमारे हिन्दू धर्मं के साथ भी है,अगर हम एक बार अच्छी तरह सोचे की धर्मं परिवर्तन किस वर्ग का होता है तो हम ये जानेंगे की धर्मं परिवर्तन हमेशा गरीबो के साथ ही होता है..क्योंकि उनको ये लालच या आज की भाषा में कहे की उनको एक ऑफर मिलता है अपना जीवन स्तर सुधारने का..जब वो अपना धर्मं परिवर्तन करा लेते है तो उनके सरनेम के साथ साथ उनके ऊपर जो गरीब और बेरोजगार होने का तमगा लगा रहता है वो भी बदल जाता है..अब उनके घर में एक नौकरी करने वाला आदमी होता है और उनके बच्चे भी स्कूल जाने लगते है..हमें ये सोचना पड़ेगा की हम अपने धर्मं के लोगो को दुसरे धर्मे में परिवर्तित होने से बचाए कैसे?हमें उनकी ज़रुरतो को समझना पड़ेगा..हमें उस कारण को ही खत्म करना पड़ेगा जिसके कारण हम हिन्दू धर्मं परिवर्तन कराने के लिए मजबूर हो जाते है...अगर हम उनकी ज़रुरतो को पूरा कर दे तो उनको धर्म बदलने की आवश्यकता ही न पड़े,ये हिन्दू संगठन जो 'धर्मं परिवर्तन' हो जाने पर उन गरीबो तक पहुच जाते है वो उनके पास तब क्यों नहीं पहुचते जब उनको ज़रूरत रहती है?,ये तथाकथित हिन्दू संगठन पुतला दहन करते है,तोड़फोड़ करते है पर धर्मं परिवर्तन के मूल कारण की तरफ कभी ध्यान नहीं देते.हम हिन्दू गणेशोत्सव पर लाखो रूपए की गणेश प्रतिमा तो हर मोहल्ले में अवश्य रख लेते है पर उन बस्तियों में जाकर उन हिन्दुओ का हाल नहीं जानते की उन गरीबो को तो यह तक पता नहीं रहता की आज गणेशोत्सव है या दिवाली,आज हमारे धर्मं के ऊंचे तबके के लोग जो आठ दिवसीय 'भागवत कथा' में इतना पैसे खर्चा कर देते है वो जाकर उतना ही पैसा उन गरीबो पर खर्चा करे,स्वामी विवेकानंद ने कहा है की कलियुग में भगवान् 'दरिद्र नारायण' के रूप में है,अगर ये ऊंचे तबके के लोग जो हिन्दू-हिन्दू करते है वो अगर उन गरीबो की तरफ ध्यान दे तो शायद ये 'धर्मं परिवर्तन' जैसा नीच काम हम हिन्दुओ के साथ न हो और हिन्दू धर्मं की संख्या भी कम न हो,मै ये सोचने पर मजबूर हू की ये जो तथाकथित हिन्दू संगठन पुतला दहन कर रहे है वो तब कहा रहते है जब ये हिन्दू परिवार भूके ही रात काट रहे होते है,जब इनके पास कोई रोज़गार नहीं होता और शिक्षा के अभाव में वो आगे भी बेरोजगार रहने को मजबूर होते है..हमें अपनी सोच को बदलना होगा,
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u r right bro................sumit
ReplyDeleteye baat to maan lete he ki chalo garib log lalach me akar dharm parivartan karte he lekin bahot se log jo ek muslim ladki se pyar karke fir muslim ban jate he wo to bhookh nahi mar raha hota he berojgar bhi nahi he bhagwan ka sab kuch diya hua hota he fir bhi ek ladki ki khatir apne dharm ko chodta he fir ladki kyon nahi hindu dharm apnati he jab ladki apne pyar k liye dharm change nahi kar rahi he to ladke kyo jarurat he. 1-2 saal pahle hariyana ke ek mantree ne hindu dharm se muslim bangye jo ek ladki ke liye uska naam chand mohamad rakha gya uski kya majboori thi kya aap bata skte he ein logo ke baare me
ReplyDeletemera to ye manana dosto ki eise dharm change karne walo ko jo hindu se dusre dharm me gya ho to usko goli mar deni chahiye taki dusre jo eisa khyal rakhte he wo bhi apna khyal nikal de kyonki koi bhi apni jaan nahi ganvana chahega.
ReplyDeletejai hind